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लो भाई बिक गई ट्रस्ट की एक और संपत्ति..शहर के बीच में स्थित जूता गोदाम भी 25 लाख में डकार गए…प्रशासन आखिर क्यों है मौन…रायगढ़ के ट्रस्ट की संपत्तियों की कब होगी जांच….

रायगढ़…सेठ किरोड़ीमल धर्मादा ट्रस्ट की संपत्तियों को बपौती समझकर धड़ाधड़ करोड़ों में सौदा कर रहे लोगों पर आखिरकार कब होगी कार्यवाही,लंबे अरसे से ट्रस्ट की संपत्तियों को लगातार बेचा जा रहा है।स्टेशन रोड की ट्रस्ट की संपत्ति को 1 करोड़ 31 लाख रुपए में बेचने की बात सामने आई है।इधर अब रायगढ़ के बीच में स्थित जूता गोदाम को भी 25 लाख रुपए में बेचे जाने की खबर सामने आ रही है।बताया जा रहा है कि डील तकरीबन पूरी हो चुकी है और विक्रेता को क्रेता ने पूरे 25 लाख रुपए भी अदा कर दिए हैं।इस पूरी डील में भी ट्रस्ट के पदाधिकारियों की भूमिका पूरी तरह संदिग्ध है।ट्रस्ट की संपत्तियों की देखरेख के लिए बनाई गई समिति अपने मूल उद्देश्यों से भटक चुकी है।

दरअसल सेठ किरोड़ीमल ने उन दिनों धर्मार्थ ट्रस्ट बनाया था और लोगों की सेवा के लिए रायगढ़ सहित देश के कई अन्य शहरों में स्कूल,अस्पताल, धर्मशाला बनाया था।लेकिन उनके अवसान के उपरांत ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने चैरिटेबल ट्रस्ट का उद्देश्य ही बदल दिया और उनकी संपत्तियों को बेचकर और किराए में देकर अपनी तिजोरियाँ भरने लगे।ट्रस्ट के पदाधिकारी रमेश मोड़ा पर ट्रस्ट की संपत्तियों के हस्तांतरण के आरोप लगते रहे हैं।वहीं रायगढ़ की ट्रस्ट की 70 फीसदी संपत्ति ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने या तो बेच दी है या फिर किराये में देकर किराएदारों से मोटी रकम वसूल कर अपनी जेबें भर रहे हैं।और इन रुपयों का कोई भी हिसाब किताब नहीं है,न तो ट्रस्ट का ऑडिट हर साल हो रहा है।और न ही कोई लेखा जोखा है।बहरहाल कोकड़ीतराई की ट्रस्ट की संपत्तियों की खरीदी बिक्री की बात सामने आने के बाद कलेक्टर ने जांच समिति गठित कर दिया है। जिसके बाद अब इस बात की उम्मीद और बढ़ गई है कि रायगढ़ की ट्रस्ट की संपत्तियों की जांच भी कलेक्टर जल्द ही करा सकते हैं।अगर ऐसा हुआ तो किरोड़ीमल धर्मादा ट्रस्ट में व्याप्त करोड़ों रुपए के भ्रष्टाचार का खुलासा हो सकता है।और कई पदाधिकारियों की असलियत भी खुलकर सामने आ जाएगी।

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