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बड़े पैमाने पर हो रही है गौ-तस्करी…झारखंड,ओडिशा और बंगाल भेजे जाते हैं पशु….कैसे चलता है ये धंधा पढिये पूरी ख़बर…

रायगढ़-:रोज़ाना गौ-तस्करों के पकड़े जाने की खबरें आती रहती हैं।लेकिन इस धंधे के तार कहाँ से जुड़े हैं।और कौन-कौन लोग इसमें संलिप्त हैं।इस बात का खुलासा आज तक नही हो पाया है।
दरअसल इस जरायम से जुड़े लोगों का बहुत बड़ा नेक्सस इस काम मे लगा हुआ है।और बहुत ही शातिराना तरीके से ये लोग काम करते हैं।झारखंड,ओडिशा और बंगाल के बड़े व्यवसायी हर माह रायगढ़ आते हैं।और यहां के लोकल बिचौलियों(कोचिया)से सौदा कर उन्हें एडवांस देकर चले जाते हैं।बाकी का काम इन स्थानीय बिचौलियों का होता है।मवेशी(गाय,भैंस,बैल,सांड)की व्यवस्था कर उन्हें बूचड़खाने तक पहुंचाने का काम ये स्थानीय बिचौलिए ही करते हैं।

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कैसे भेजे जाते हैं पशु…

पैदल हांककर और ट्रकों या फिर पिकप के माध्यम से होती है गौ-तस्करी,स्थानीय बिचौलिए आधा दर्जन लोगों का ग्रुप बनाकर उन्हें इकठ्ठे किये गए पशुओ को हाँककर जंगल के रास्ते बूचड़खानों तक भेजते हैं।इस काम मे कई ग्रुप एक साथ काम करते हैं।हरेक ग्रुप को रोजाना 40 से 50 किलोमीटर तक मवेशियों को ले जाना होता है। आगे की जिम्मेदारी अगले ग्रुप की होती है।इसी तरह ट्रकों और पिकप के जरिये भी तस्करी होती है।

कैसे होता है सौदा…

बताया जा रहा है की दूसरे प्रान्त से आने वाले व्यवसायी लोकल व्यपारियों से 100 रुपये किलो के हिसाब से सौदा करते हैं। मसलन किसी पशु का वजन अगर 100 किलो है तो उसकी कीमत 100 रुपये किलो के लिहाज से 10 हजार हो जाती है।फिर उसे बाहर ले जाकर बूचड़खानों में काटकर 300 से 400 रुपये किलो में बेचा जाता है।

रायगढ़ में भी बिक रहा गौमांस…

जानकारी मिल रही है की रायगढ़ के भी कई मोहल्लों में गौमांस बिकता है।चुनिंदा दिन ओडिशा के बेलपहाड़ और झारसुगड़ा के कुछ कसाई ट्रैन और बाइक के जरिये बड़े झोलों और बैग में गौमांस लेकर रायगढ़ आते हैं।और तय किये गए किसी एक घर मे खरीददारों को बुलवा कर मांस बेच के चले जाते हैं।

आखिर गौ-तस्करी में कौन है संलिप्त…

रायगढ़ के ही कई पशु विक्रेता इस काम मे संलिप्त हैं।सूत्रों की माने तो दिखावे के लिए ये तथाकथित व्यवसायी दुधारू पशुओं का काम करते हैं। लेकिन असल मे इनका पेशा गौ-तस्करी करना ही है।सांगीतराई में दो लोग,छातामुड़ा में करीबन 4 चार लोग,पंडरीपानी व शहर के बीच मे ही रहने वाले दर्जनभर ऐसे व्यवसायी हैं जो दुधारू पशुओं की आड़ में गौ-तस्करी में इन्वाल्व हैं।

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