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पूज्य प्रियदर्शी ने होली में दिया प्रेम भाईचारे से गले मिलने का सन्देश

रायगढ :- अघोर गुरु पीठ ट्रस्ट बनोरा के संस्थापक बाबा प्रियदर्शी राम जी ने उत्तरप्रदेश स्थित रेनुकोट आश्रम में होली पर्व के दौरान कहा कि यह पर्व नव वर्ष की शुरुवात माना जाता है l बाबा प्रियदर्शी ने कहा कि होली पर्व के दौरान होलिका दहन किया जाता है l होलिका दहन में इस बात का संदेश छिपा होता है कि बुराई व झूठ कितना भी शक्तिशाली हो जाए लेकिन अंत मे उसे जलना ही होता है l भक्त प्रह्लाद को मिटाने का अंतिम प्रयास हिरण्यकश्यप की बहन होलिका ने किया l होलिका को यह वरदान हासिल था कि अग्नि होलिका को नही जला सकती l उसने भक्त प्रह्लाद को जलाने के उद्द्देश्य से लकड़ियों के मध्य बैठ गई l अग्नि का दुरुपयोग करने के दौरान होलिका स्वयं जल कर खाक हो गई l भक्त प्रह्लाद भगवान की कृपा से बच गए l मानव समाज के लिए यह प्रसंग प्रेरणादाई है l नव वर्ष की शुरुवात होली के पावन पर्व से शुरू होती है इस दिन जाति धर्म के बंधन से ऊपर उठते हुए आपसी प्रेम भाईचारे के साथ गले मिलकर खुशियो का रंग गुलाल लगाया जाता है l बाबा प्रियदर्शी ने इस पर्व पर नशे के परित्याग का आह्वान भी किया l नशा मुक्त समाज के निर्माण से ही राष्ट्र सबल हो सकता है l नशा मनुष्य को खोखला करता है जिसका असर राष्ट्र पर भी पड़ता है l

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